प्रतिबंधित खनन को चुनौती दे रहा नगला खेड़ा व नगला के खेतों में खनन माफियाओं का आतंक
कई हजार घन मीटर मिट्टी का अवैध खनन, किसानों की उपजाऊ भूमि बर्बाद
डिबाई (केपी सिंह चौहान)।
तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम लेदर खेड़ा एवं भूड़ का नगला के खेतों में खनन माफियाओं का आतंक चरम पर है। क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से मिट्टी का खनन किया जा रहा है, जिससे किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह क्षतिग्रस्त होती जा रही है।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि खनन माफिया जेसीबी मशीनों,किढढ़ा टैक्टर व ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मदद से रात्रि के समय खेतों से कई हजार घन मीटर मिट्टी निकाल रहे हैं। खेतों में गहरे-गहरे गड्ढे बन जाने से खेती करना लगभग असंभव हो गया है। कई स्थानों पर खेत तालाब का रूप ले चुके हैं, जिससे आने वाले समय में कृषि संकट और गहराने की आशंका है।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन की शिकायतें कई बार राजस्व एवं खनन विभाग से की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस व प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई। कार्यवाही न होने से खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। विरोध करने पर किसानों को दबाव, धमकी और भय का सामना करना पड़ रहा है।
इस अवैध खनन से न केवल किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है, बल्कि भू-क्षरण, जलभराव, जलस्तर असंतुलन और पर्यावरणीय क्षति जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं। खनन स्थलों के आसपास के किसानों की मेढ़ की मिट्टी गड्ढों में गिर जाने से भूमि का सीमांकन बिगड़ रहा है, जिससे खेतों का रकबा प्रभावित हो रहा है और आए दिन आपसी विवाद व झगड़े की स्थिति बन रही है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी भारी रोष है कि सरकार द्वारा प्रतिबंधित खनन के बावजूद खुलेआम ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से मिट्टी ढोकर सड़कों के किनारे व कालोनियों के प्लांटों में भराव किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण सड़कों की हालत बद से बदतर होती जा रही है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी बुलंदशहर से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कराकर खनन की पैमाइश घन मीटर के हिसाब से कराई जाए तथा नियमों के अनुसार भारी जुर्माना और सख्त कानूनी कार्यवाही की जाए। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में कृषि और सामाजिक संकट और भी गहरा सकता है।

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