डिबाई/क्षेत्रीय संवाददाता।
क्षेत्र में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सरकारी एवं संरक्षित वृक्षों की कटान संबंधी शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्यवाही न होने के आरोपों ने विभागीय व्यवस्था को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं पत्रकारों का कहना है कि वन संरक्षण से जुड़े नियमों के पालन को लेकर जमीन पर गंभीरता दिखाई नहीं दे रही।
आरोप है कि विभिन्न क्षेत्रों में पेड़ों की कटान एवं वन संपदा को नुकसान पहुंचाने की शिकायतें समय-समय पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गईं, लेकिन कई मामलों में शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित दिखाई दी। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मौके पर प्रभावी निरीक्षण और जिम्मेदारी तय करने के बजाय शिकायतों को निराधार बताकर बंद करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि अधीनस्थ अधिकारियों के विरुद्ध शिकायत होने पर उच्च स्तर से अपेक्षित संज्ञान नहीं लिया जाता। इससे शिकायतकर्ताओं में निराशा और अविश्वास की स्थिति बन रही है। लोगों का कहना है कि यदि किसी मामले में जांच होती भी है तो उसके परिणाम सार्वजनिक नहीं किए जाते, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
पत्रकारों एवं नागरिकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को लक्ष्य बनाना नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कानून के प्रभावी पालन को सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि यदि शिकायतों पर समयबद्ध और निष्पक्ष जांच हो तथा कार्यवाही की जानकारी सार्वजनिक की जाए तो विभाग के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत हो सकता है।
क्षेत्रीय नागरिकों ने मांग की है कि वन विभाग के उच्चाधिकारी सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराएं, संबंधित मामलों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करें तथा यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें।








