Tuesday, 2 June 2026

साइकिल चलाएं, बीमारियां भगाएं: सेहत और पर्यावरण की सच्ची साथी बनी साइकिल

चिकित्सक भी दे रहे साइकलिंग की सलाह, फिटनेस के लिए बढ़ा लोगों का रुझान

शिकारपुर। (अशोक पाठक)

विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर साइकिल एक बार फिर लोगों की दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती दिखाई दे रही है। बदलती जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच लोग फिट रहने के लिए साइकिल का सहारा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा भी नागरिकों से पेट्रोल-डीजल के उपयोग को कम कर सार्वजनिक परिवहन एवं साइकिल के प्रयोग को बढ़ावा देने की अपील की जा चुकी है। इसके बाद लोगों में साइकिलिंग के प्रति रुचि तेजी से बढ़ी है।


कभी आम आदमी की सवारी मानी जाने वाली साइकिल आज फिटनेस का प्रतीक बन गई है। सुबह और शाम नगर तथा ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग साइकलिंग करते हुए दिखाई देते हैं। चिकित्सकों के अनुसार नियमित साइकिल चलाने से शरीर की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं, रक्त संचार बेहतर होता है और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी कम होता है। यही कारण है कि डॉक्टर भी लोगों को प्रतिदिन कम से कम पांच किलोमीटर साइकिल चलाने की सलाह दे रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण में भी निभा रही अहम भूमिका

कोरोना काल के बाद स्वास्थ्य के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ी है। ऐसे में अनेक लोगों ने फिटनेस के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए साइकिल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया है। साइकिल न केवल ईंधन की बचत करती है बल्कि वायु प्रदूषण को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

बीमारी के बाद शुरू की साइकलिंग

नगर निवासी 70 वर्षीय मनवीर शर्मा बताते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए वे काफी समय से नियमित रूप से साइकिल चला रहे हैं। वे प्रतिदिन शिकारपुर से पहासू तक साइकिल यात्रा करते हैं। वहीं अजय शर्मा भी प्रतिदिन सुबह साइकिल चलाते हैं। उनका कहना है कि बीमारी के दौरान लोगों ने उन्हें साइकिल चलाने की सलाह दी थी, जिसके बाद उन्होंने इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया और अब वे स्वयं को पहले से अधिक स्वस्थ महसूस करते हैं।

मोहल्ला चौक निवासी पंकज शर्मा बताते हैं कि कुछ समय पहले उनका वजन काफी बढ़ गया था। चिकित्सकों और परिचितों की सलाह पर उन्होंने दौड़ लगाने के साथ साइकिल चलाना शुरू किया। धीरे-धीरे यह उनकी आदत बन गई। उनका कहना है कि यदि दो दिन साइकिल न चला पाएं तो शरीर में सुस्ती और अस्वस्थता महसूस होने लगती है।नगर के पहासू रोड और बालाजी मार्केट स्थित साइकिल दुकानों पर आधुनिक गियर वाली साइकिलों की मांग लगातार बढ़ रही है। दुकानदार मुमताज मलिक के अनुसार बाजार में विभिन्न कंपनियों की साइकिलें उपलब्ध हैं, जिनमें गियर वाली साइकिल युवाओं और बच्चों की पहली पसंद बनी हुई हैं। इनकी कीमत लगभग पांच हजार रुपये से लेकर बीस हजार रुपये तक है। भले ही शहरों में मोटरसाइकिल और स्कूटी का चलन बढ़ गया हो, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी साइकिल लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। करैना निवासी 70 वर्षीय रामेश्वर बताते हैं कि उनके समय में साइकिल ही सबसे भरोसेमंद और सुलभ साधन हुआ करती थी। आज भी वे साइकिल चलाना पसंद करते हैं और मानते हैं कि नियमित साइकिल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है विश्व साइकिल दिवस पर विशेषज्ञों का भी यही संदेश है कि साइकिल केवल एक साधन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन का आधार है। यह सेहत की साथी, प्रदूषण की दुश्मन और पर्यावरण संरक्षण की मजबूत कड़ी है। यदि लोग अपने दैनिक जीवन में साइकिल को शामिल करें तो न केवल उनका स्वास्थ्य बेहतर होगा बल्कि समाज और पर्यावरण को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

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